क्या आपको लगता है कि स्कूल में पढ़ाया गया इतिहास संपूर्ण सत्य है?
आर्यावर्त इतिहास संस्थान केवल एक प्रकाशन या मीडिया मंच नहीं है; यह एक वैचारिक क्रांति और जागृति है। हमारा उद्देश्य भारत के उस यथार्थ एवं गौरवमय इतिहास को उजागर करना है, जिसे सदियों तक विदेशी आक्रान्ताओं, औपनिवेशिक चश्मे एवं पश्चिमी दृष्टिकोण ने "मिथक" कहकर दबा दिया।
भारत, जिसे हम आर्यावर्त कहते हैं, विश्व का प्राचीनतम ज्ञान केंद्र था। हमारे ऋषियों ने लाखों वर्ष पहले विज्ञान, विमान शास्त्र और दर्शन की जो ऊंचाइयां छुईं, वह आज के आधुनिक विज्ञान से भी कहीं अधिक उन्नत थीं। फिर भी, एक गहरी वैश्विक साजिश के तहत हमें यह बताया गया कि हमारी सभ्यता “पिछड़ी” थी। आर्यावर्त इतिहास संस्थान इसी झूठे नैरेटिव को तोड़ने और सनातन धर्म के वास्तविक वैज्ञानिक आधार को दुनिया के सामने रखने का एक दृढ़ संकल्प है।
हमारी विचारधारा: मानसिक गुलामी से पूर्ण स्वतंत्रता:
वर्ष 1947 में भारत को शारीरिक और भौगोलिक स्वतंत्रता तो मिल गई, परंतु आज भी हम एक भयानक 'मानसिक और बौद्धिक दासता' से ग्रसित हैं। आज हमारे समाज की स्थिति यह है कि भाषा विदेशी, पोशाक विदेशी, खानपान विदेशी, हमारी चिकित्सा विदेशी और हमारा विज्ञान भी विदेशी है।
लॉर्ड मैकॉले ने 1835 में जिस मानसिक रूप से अंग्रेज वर्ग को बनाने का षड्यंत्र रचा था, आज का समाज उसी दिशा में जा रहा है। अपनी मातृभाषा बोलने वाले को हीन दृष्टि से देखा जाता है और विदेशी भाषा व वेशभूषा को श्रेष्ठ माना जाता है। हमारा मानना है कि शारीरिक गुलामी से कहीं अधिक खतरनाक यह मानसिक गुलामी है।
जब तक कोई देश, उसका समाज और उसके नागरिक बौद्धिक दासता की जंजीरों से बाहर नहीं निकलते, तब तक वह राष्ट्र सच्चे अर्थों में "आत्मनिर्भर" नहीं बन सकता।
हमारे प्रमुख लक्ष्य और कार्य:
हम आर्यावर्त इतिहास संस्थान के मंच से उस भारतवर्ष का पुनर्निर्माण करना चाहते हैं जो अपने ज्ञान और विज्ञान पर गर्व करे:
सत्य इतिहास और वैदिक विज्ञान का शोध: रामायण का पुष्पक विमान और महाभारत के अस्त्र कोई मिथक नहीं, बल्कि उन्नत तकनीक (Technology) थे। हम महर्षि भरद्वाज, सुश्रुत, आर्यभट्ट और कणाद जैसे महान ऋषियों के वैदिक विज्ञान (Vedic Physics) पर अनुसंधान कर उसे आधुनिक संदर्भ में प्रमाणित करने का कार्य कर रहे हैं।
सनातन ज्ञान और आधुनिकता का समन्वय: हमारा स्पष्ट मानना है कि धर्म और विज्ञान दो अलग विषय नहीं हैं। हम इसी ज्ञान को अपनी पुस्तकों और शोध पत्रों के माध्यम से समाज तक पहुंचाते हैं।
स्वदेशी जीवनशैली का पुनर्जागरण: पश्चिमी नकल को छोड़कर अपनी पारंपरिक वेशभूषा, आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति और गौ-माता पर आधारित जैविक कृषि को पुनः स्थापित करना हमारी प्राथमिकता है।
बौद्धिक स्वतंत्रता: हम एक ऐसा ईकोसिस्टम तैयार कर रहे हैं जहाँ भारतवासी पश्चिमी विचारकों की नकल करने के बजाय, अपने पूर्वजों के महान ज्ञान से सीखकर नई तकनीकों का विकास करें।
हमारी यात्रा में शामिल हों
आइए, राष्ट्र आराधन के इस महायज्ञ में हमारे साथ जुड़ें। हम पूर्वजों की इस महान सभ्यता को पुनः अपनाएं और मिलकर इस सनातन सभ्यता को फिर से विश्व के शिखर पर स्थापित करें। हमारा खोया हुआ आत्मस्वाभिमान फिर से जगेगा और हमारा देश पुनः जगतगुरु बनेगा।
अतीत को जानें, गर्व करें, और धर्ममय भविष्य बनाएं।
ईश्वर हमें शक्ति दे। ओम शांति!
आर्यावर्त इतिहास संस्थान भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) के अंतर्गत एक पंजीकृत सूक्ष्म उद्यम और प्रकाशन संस्था है