धर्म का तीसरा लक्षण 'दया': शिव-पार्वती संवाद, पूँजीवाद का पाखण्ड और आज के युग में सबसे दुःखी कौन? | आर्यावर्त इतिहास संस्थान

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धर्म का तीसरा लक्षण 'दया': शिव-पार्वती संवाद, पूँजीवाद का पाखण्ड और आज के युग में सबसे दुःखी कौन? | आर्यावर्त इतिहास संस्थान
महाभारत में जब भीष्म पितामह शर-शय्या पर थे, तब राजा युधिष्ठिर को धर्म के विषय में भगवान शिव और देवी पार्वती माता का संवाद सुनाते हैं। एक बात मैं यह कहना चाहूँगा कि भगवान शिव एक ऐतिहासिक महापुरुष थे, जो देव-वर्ग में उत्पन्न हुए थे, सतयुग में आज से तकरीबन 37-38 लाख वर्ष पूर्व कम से कम। भगवान शिव से भगवती पार्वती माता पूछती हैं कि धर्म का क्या लक्षण है, तब भगवान शिव कहते हैं कि धर्म के चार लक्षण हैं - अहिंसा, सत्य बोलना, सब प्राणियों पर दया करना और मन तथा इन्द्रियों पर नियन्त्रण रखना। इस लेख में हम बात करेंगे भगवान शिव द्वारा निर्दिष्ट धर्म के तीसरे लक्षण दया के विषय पर। महर्षि पतञ्जलि ने कहा, करुणा दया है, दुःखी को देखकर दया होनी चाहिए। आज हम देखेंगे संसार में दुःखी कौन है और इससे भी पहले दया कौन कर सकता है। दया की भावना या जितने भी धर्म के लक्षण हैं, वह भावना कब आएगी? जब हमें विश्वास हो जाएगा कि सभी प्राणियों में मेरे जैसा आत्मा है और सभी प्राणी चेतन हैं। यह मशीन नहीं हैं, रोबोट नहीं हैं, जड़ नहीं हैं और एक परमात्मा की सत्ता भी है तथा उस परमात्मा के परिवार के सभी प्राणी सदस्य हैं। जब तक ऐसा…

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